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रविवार, 4 अक्तूबर 2015

मेरा नन्हा चित्रकार


पुत्र आयुष को अपने शुरूआती  दिनों से ही खाली समय  में अपनी   पेन्सिल  रंग  पेंट आदि से चित्रकारी करने का शौक रहा है और मुझे भी उसे ऐसा  करते हुए देखने में आनंद आता है | मैं भी उसे उसकी इस आदत या शौक को आगे बढाने के लिए उसे तरह तरह के रंग पेंट ब्रश आदि  देता रहता हूँ | आप उसकी कुछ चित्रकारी इन पोस्टों पर देख कर सराह चुके हैं , देखिये इन दिनों उसने क्या क्या  कोशिश की है









मंगलवार, 16 सितंबर 2014

गोलू बुलबुल इन कनक घाटी , जयपुर



अभी कुछ समय पहले ही बुलबुल और गोलू अपने चाचा जी के यहां जयपुर घूमने गए थे ऐसे में कनक घाटी ,जयपुर में पूरा परिवार पिकनिक मनाने , घूमने , झूला झूलने और मस्ती करने न जाए ऐसा कैसे हो सकता है भला , और देखिए क्या क्या मस्ती मची बस्ती में

कनक घाटी का नोटिस बोर्ड


सबसे पहले पेट पूजा की जाए , चाचा चाची के साथ बुलबुल एंड कंपनी

चलो अब जरा पींगे मारी जाएं



ये लो मैं बैठ गई इस तबले वाले झूले पर भी

अरे वाह , ये तो खूब उछलता है

जरा अब इसमें घुस कर देखा जाए ये क्या है

गुगु भईया आपको समझ में आया ये क्या है

रुको मैं स्पीड से इसका एक चक्कर लगाती हूं शायद कुछ पता चले

दफ़ा करो ...इस वाले को ट्राई करके देखते हैं , भईया तो आसन जमा के बैठ गए हैं

मुश्किल वक्त , कमांडो सख्त

कदम कदम बढाए जा

और बढाए जा

गुगु भईया के साथ बुलबुल

और ये रहा ग्रीन कार्पेट
 आखिर की सारी उठापटक , कूदम कूद , पकडम पकडाई इसी ग्रीन कार्पेट पर खेल खेल कर कनक घाटी को सर पर उठा लिया पूरी बच्चों की पूरी फ़ौज ने , तो जब भी जयपुर जाना इस कनक घाटी में जरूर खेलने जाना . ...........प्रॉमिस

शुक्रवार, 27 जून 2014

बुलबुल गोलू in दिल्ली का ZOO


गोलू और बुलबुल के स्कूलों की छुट्टियां हुईं तो बहुत समय से चिडियाघर घूमने जाने का बन रहा कार्यक्रम आखिरकार फ़ायनल हो ही गया । आयुष (गोलू) जी , डिस्कवरी चैनल पे शौक से जानवरों ,पक्षियों पर आधारिक कार्यक्रम देख देख कर एक शिद्दत पाल रहे थे और पूरे उत्साह के साथ तैयार थे चिडियाघर घूमने के लिए  और बुलबुल तो बुलबुल ठहरी , चहकने फ़ुदकने का मौका भला कहां हाथ से जाने दे ...

बुलबुल जी ने चिडियाघर में पहुंचते ही पहले अपनी गड्डी संभाली और फ़िर तैयार हो गई गड्डी फ़ुर्रर्रर्रर्र होने के लिए ,....


बुलबुल जी , चिडियाघर में चलने वाली बैटरी गड्डी की चालक सीट पर 


सवारियां भी बैठ कर घूमने के लिए एकदम तैयार




बडे तोते का  बडा पिंजरा

अहा कितने सुंदर सुंदर हिरण , सफ़ेद भी



सफ़ेद मोर और रंग बिरंगा मोर भी




पानी में गोते लगाता हिप्पो बोले तो दरियाई घोडा

अपने बाडे में चक्कर लगाता जैगुआर

आराम फ़रमाता नन्हा चीता

बिल्कुल पास आया जैगुआर



ईमू जी सपरिवार


चिडियाघर में बना सुंदर बाग

मनमोहक मनोरम बाग


गोलू जी ,पापा के साथ

बुलबुल जी पापा के साथ


बुलबुल जी मम्मा के साथ
और सैर हो गई पूरी ..................टाटा जी बाय बाय , फ़िर मिलेंगे ।

रविवार, 23 मार्च 2014

झप्पी विद टफ़ी

अभी दो दिन पहले ही पडोस/आसपास से ये बिल्ली शावक अचानक ही सीढीयों में दिख गया । बस फ़िर क्या था बुलबुल और गोलू जी की पौ बारह हो गई । दो दिन पहले मिला ये नन्हा दोस्त भी इनसे यूं हिल मिल गया मानो जाने पिछले जन्म की मुलाकात हो । इस नन्हीं जान के लिए आनन फ़ानन में छोटा सा घर , दूध पीने के कटोरी , और ठंड से बचाने के लिए नर्म नर्म गद्देदार छोटा बिस्तर की पूरी व्यवस्था की गई । अब इस नए मेहमान जिसका नाम बुलबुल ने "टफ़ी" रखा है की सेवा में दोनों भाई बहन एकदम व्यस्त रहते हैं और ये बिल्लौटा भी इन दोनों की गोद में आकर यूं पसर जाता है मानो बाप का राजसिंहासन हो , देखिए .............

टफ़ी और बुलबुल

मेरी प्यारी टफ़ी

चल मुंह उधर कर , पोज़ मारके फ़ोटो खिंचवा

ऐसे न :) :)

बुधवार, 25 दिसंबर 2013

टू चिल्ड्रेन इन चिल्ड्रैन पार्क ....वाया इंडिया गेट





जितनी ही जिम्मेदारी और प्रतिबद्धता हमारी , हमारे जीवन से जुडे अन्य पहलुओं , नौकरी , गृहस्थी , पढाई लिखाई और अन्य ऐसी ही बातों के लिए है उतनी ही अपने बच्चों के लिए भी है । मैंने इस मामले में एक तय नियम बनाया हुआ है , जब भी बच्चों के साथ खेलने पढने और यहां तक कि उनके साथ बैठ कर टीवी देखने का भी मौका भी मुझे मिलता है , मैं उसे हाथ से जाने नहीं देता । फ़िर चाहे वो छत पर क्रिकेट खेलने का हो या बुलबुल के साथ बैठ उसके "टॉम एंड जैरी" देखने का , आयुष हमेशा मेरे साथ डिस्कवरी और हिस्ट्री जैसे चैनल मुझसे दूने उत्साह के साथ देखता है , मुझे भी ज्यादा मज़ा आता है ।


आज अचानक हमें आदेश दे दिया गया कि ,आज तो इंडिया गेट और उसके समीप ही स्थित चिल्डैन पार्क की ओर कूच करना ही करना है । बस जी , आगे की कहानी आप इन फ़ोटोज़ के सहारे देखिए पहले



इंडिया गेट की उस दिन खासी धुलाई हो रही थी

.
इंडिया गेट के आसपास


अमर जवान ज्योति स्तंभ के साथ जय जवान भी
 

और एक पोज़ वाली ईश्टाईल की फ़ोटो भी हो जाए

चिल्ड्रेन पार्क में मस्ती करना तो हमारा जन्मसिद्ध अधिकार है



मस्ती एंड झूला टाईम



अरे वाह , पापा देखो कित्ती सारी मछलियां हैं





एक फ़ोटो शेर जी के साथ


ओपन थिएटर की दर्शक दीर्घा में सबसे ऊपर बैठ कर एक हो जाए

अब मंच पर उतर के तितली उडी भी गा ही लिया जाए

एकदम नहाए धोए ताज़े ताज़े फ़ूल से स्नान के बाद

 चलिए अब आप सबको बाय बाय , फ़िर मिलेंगे अगली किसी पोस्ट के सथ

गुरुवार, 5 सितंबर 2013

हैप्पी टीचर्स डे



बु्लबुल को अपनी संगीता मैम के लिए टीचर्स डे पर एक बधाई कार्ड लेकर जाना है । भईया गोलू ने कुछ चित्रों को काट और चिपका कर उसके लिए एक सुंदर सा कार्ड तैयार किया है देखिए :