इस गैज़ेट में एक गड़बड़ी थी.

गुरुवार, 23 सितंबर 2010

बुलबुल को मिली जासूसी की सज़ा ....




आज तो पापा के लिए कुछ एक्सक्लुसिव खबर रखती हूं ....देखती हूं पापा के क्रेडिट कार्ड में मम्मी ने कितना माल छोडा है ..........ओह ये बिंदियों का पत्ता......चलो कुछ दिनों के बाद इसमें अपना भी शेयर होगा ..........






यार ये बिंदी के पत्ते हमेशा ही इस साईज़ के होते हैं .....आज इसे फ़ाड कर इस का सारा राजफ़ाश कर देती हूं ....



छोटी....................ईईईईईई...
ओह मम्मी ...........






चल पूरे घर में फ़ुदकती फ़िरती है ....चल अब बैठ इस छोटी आलमारी के ऊपर चुपचाप ....





हुर्रे ..ये तो और भी कुछ बडा सा मिल गया ....फ़ाडने के लिए ......ये गया ...फ़र्रर्रर्रर्रर्रर्रर्रर्रर्रर्रर्रर.......

5 टिप्‍पणियां:

  1. बुलबुल .. जासूसी करती रहो पापा की

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  2. पता नहीं मेरी नजर से कैसे बच गए ये शरारती... अब मार्क कर लिया है...


    झा जी.. welcome to the wonderful world of KIDS..

    गोलू और बुलबुल को यहाँ भर्ती करवा रहा हूँ,,,
    http://hindikids.feedcluster.com/

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  3. सजा ? किसी सजा ?

    कोई कानून हमें सजा नहीं दे सकता , लगे रहो

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  4. बेटी एक काम मेरा जरा कर देना तो...
    अपने पापा का ऐ.टी.एम् और क्रेडिट कार्ड का डिटेल जरा अपने इस अंकल तो बताना तो...तुमको बहुत सारा चोकलेट खिलाएंगे...:)

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