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शुक्रवार, 27 जून 2014

बुलबुल गोलू in दिल्ली का ZOO


गोलू और बुलबुल के स्कूलों की छुट्टियां हुईं तो बहुत समय से चिडियाघर घूमने जाने का बन रहा कार्यक्रम आखिरकार फ़ायनल हो ही गया । आयुष (गोलू) जी , डिस्कवरी चैनल पे शौक से जानवरों ,पक्षियों पर आधारिक कार्यक्रम देख देख कर एक शिद्दत पाल रहे थे और पूरे उत्साह के साथ तैयार थे चिडियाघर घूमने के लिए  और बुलबुल तो बुलबुल ठहरी , चहकने फ़ुदकने का मौका भला कहां हाथ से जाने दे ...

बुलबुल जी ने चिडियाघर में पहुंचते ही पहले अपनी गड्डी संभाली और फ़िर तैयार हो गई गड्डी फ़ुर्रर्रर्रर्र होने के लिए ,....


बुलबुल जी , चिडियाघर में चलने वाली बैटरी गड्डी की चालक सीट पर 


सवारियां भी बैठ कर घूमने के लिए एकदम तैयार




बडे तोते का  बडा पिंजरा

अहा कितने सुंदर सुंदर हिरण , सफ़ेद भी



सफ़ेद मोर और रंग बिरंगा मोर भी




पानी में गोते लगाता हिप्पो बोले तो दरियाई घोडा

अपने बाडे में चक्कर लगाता जैगुआर

आराम फ़रमाता नन्हा चीता

बिल्कुल पास आया जैगुआर



ईमू जी सपरिवार


चिडियाघर में बना सुंदर बाग

मनमोहक मनोरम बाग


गोलू जी ,पापा के साथ

बुलबुल जी पापा के साथ


बुलबुल जी मम्मा के साथ
और सैर हो गई पूरी ..................टाटा जी बाय बाय , फ़िर मिलेंगे ।

बुधवार, 25 दिसंबर 2013

टू चिल्ड्रेन इन चिल्ड्रैन पार्क ....वाया इंडिया गेट





जितनी ही जिम्मेदारी और प्रतिबद्धता हमारी , हमारे जीवन से जुडे अन्य पहलुओं , नौकरी , गृहस्थी , पढाई लिखाई और अन्य ऐसी ही बातों के लिए है उतनी ही अपने बच्चों के लिए भी है । मैंने इस मामले में एक तय नियम बनाया हुआ है , जब भी बच्चों के साथ खेलने पढने और यहां तक कि उनके साथ बैठ कर टीवी देखने का भी मौका भी मुझे मिलता है , मैं उसे हाथ से जाने नहीं देता । फ़िर चाहे वो छत पर क्रिकेट खेलने का हो या बुलबुल के साथ बैठ उसके "टॉम एंड जैरी" देखने का , आयुष हमेशा मेरे साथ डिस्कवरी और हिस्ट्री जैसे चैनल मुझसे दूने उत्साह के साथ देखता है , मुझे भी ज्यादा मज़ा आता है ।


आज अचानक हमें आदेश दे दिया गया कि ,आज तो इंडिया गेट और उसके समीप ही स्थित चिल्डैन पार्क की ओर कूच करना ही करना है । बस जी , आगे की कहानी आप इन फ़ोटोज़ के सहारे देखिए पहले



इंडिया गेट की उस दिन खासी धुलाई हो रही थी

.
इंडिया गेट के आसपास


अमर जवान ज्योति स्तंभ के साथ जय जवान भी
 

और एक पोज़ वाली ईश्टाईल की फ़ोटो भी हो जाए

चिल्ड्रेन पार्क में मस्ती करना तो हमारा जन्मसिद्ध अधिकार है



मस्ती एंड झूला टाईम



अरे वाह , पापा देखो कित्ती सारी मछलियां हैं





एक फ़ोटो शेर जी के साथ


ओपन थिएटर की दर्शक दीर्घा में सबसे ऊपर बैठ कर एक हो जाए

अब मंच पर उतर के तितली उडी भी गा ही लिया जाए

एकदम नहाए धोए ताज़े ताज़े फ़ूल से स्नान के बाद

 चलिए अब आप सबको बाय बाय , फ़िर मिलेंगे अगली किसी पोस्ट के सथ